भारत और बांग्लादेश की सीमा पर इन दिनों एक भारी तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है, जिसने कूटनीतिक गलियारों से लेकर सरहद तक हलचल तेज कर दी है। यह कोई सामान्य सीमा विवाद नहीं है, बल्कि ‘नए भारत’ के उस कड़े रुख का परिणाम है जिसे देखकर सीमा पार सुरक्षा बलों के होश उड़े हुए हैं। कूच बिहार के मेखलीगंज ब्लॉक का वह इलाका, जिसे दशकों तक शांत माना जाता था, आज एक बड़े टकराव का केंद्र बन चुका है। भारतीय सीमा सुरक्षा बल (BSF) का रुख पूरी तरह से स्पष्ट और सख्त है, वहीं दूसरी ओर बांग्लादेशी गार्ड्स (BGB) की बेचैनी साफ देखी जा सकती है। भारतीय जवानों ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी जमीन पर वह कार्य शुरू कर दिया है, जिसने घुसपैठियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि तीन बीघा कॉरिडोर के पास दोनों देशों के बल आमने-सामने आ गए, जिसके बाद कमांडर स्तर की फ्लैग मीटिंग बुलानी पड़ी।
इस पूरे विवाद की मुख्य वजह वह मजबूत बाड़बंदी (fencing) है, जिसे BSF ने भारत-बांग्लादेश सीमा के एक खुले हिस्से पर तेजी से शुरू किया है। यह फेंसिंग भारत की सुरक्षा का एक अभेद्य कवच बनने जा रही है। जैसे ही सीमा पर खंभे गाड़ने का काम शुरू हुआ, बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने पुराना तर्क दिया कि यह निर्माण अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है। इसके बाद BSF और BGB के बीच तीखी बहस हुई और माहौल काफी गरमा गया। हालांकि, BSF ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा और फेंसिंग का काम किसी भी हाल में नहीं रुकेगा। इस आक्रामक रुख ने बांग्लादेशी अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है।
तीन बीघा कॉरिडोर के भौगोलिक महत्व को समझना आवश्यक है। यह कूच बिहार में स्थित एक संकरा गलियारा है, जिसे भारत ने एक विशेष समझौते के तहत बांग्लादेश को लीज पर दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य बांग्लादेशी नागरिकों को बिना वीजा के अपने दाहाग्राम-अंगारपोटा एन्क्लेव तक आने-जाने की सुविधा देना था। भारत ने हमेशा एक अच्छे पड़ोसी का धर्म निभाया है, लेकिन जब इसी सुविधा की आड़ में सुरक्षा को खतरा पैदा होने लगे, तो सख्त कदम उठाना अनिवार्य हो जाता है। वर्तमान भारत अपनी संप्रभुता को लेकर अत्यंत गंभीर है।
BGB की बौखलाहट का असली कारण बाड़बंदी के काम को रोकना है। उनका दावा है कि भारत ‘जीरो लाइन’ से महज 10-20 गज की दूरी पर खंभे गाड़ रहा है, जो 150 गज के अंतरराष्ट्रीय नियम का उल्लंघन है। हालांकि, BSF ने फ्लैग मीटिंग में तकनीकी प्रमाणों के साथ जवाब दिया कि यह कोई स्थायी निर्माण नहीं बल्कि भूमि पैमाइश का हिस्सा है। भारतीय अधिकारियों का मानना है कि BGB नियमों का बहाना बनाकर केवल सुरक्षा कार्य में बाधा डालना चाहती है, लेकिन BSF के ठोस तर्कों के सामने उनके पास कोई जवाब नहीं था।
भारत का यह फेंसिंग मास्टरप्लान बहुत बड़ा और दूरदर्शी है। जमालदाहा से तीन बीघा कॉरिडोर तक लगभग 105 एकड़ जमीन पर बाड़बंदी की जानी है ताकि घुसपैठ के सभी रास्तों को सील किया जा सके। राहत की बात यह है कि 30 एकड़ का काम पहले ही सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। अब सरकार 25 किलोमीटर लंबी अभेद्य फेंसिंग के लिए मेखलीगंज के गांवों से 80 एकड़ अतिरिक्त जमीन का अधिग्रहण कर रही है। साल 2026 का डेटा बताता है कि भारत अब अपनी सरहदों की एक-एक इंच जमीन की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से मुस्तैद है।
असली समस्या नियमों की नहीं, बल्कि उस अवैध नेटवर्क की है जो इस खुले रास्ते से चलता है। स्थानीय विधायक दधिराम रॉय ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि बांग्लादेश जानबूझकर तीन बीघा समझौते की शर्तों की अनदेखी कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि यह हस्तक्षेप जारी रहा, तो इसके परिणाम गंभीर होंगे। यह गलियारा तस्करी और अवैध गतिविधियों के लिए बेहद संवेदनशील है, क्योंकि दाहाग्राम-अंगारपोटा एन्क्लेव तीन तरफ से भारतीय जमीन से घिरा है और चौथी तरफ तीस्ता नदी है।
घुसपैठिए तीस्ता नदी और कॉरिडोर के खुलेपन का फायदा उठाकर रात के अंधेरे में भारतीय सीमा में प्रवेश करते हैं। मवेशी तस्करी और अन्य गैरकानूनी कार्य इन्हीं रास्तों से होते हैं। इस नई फेंसिंग के बाद इस काले साम्राज्य पर ताला लग जाएगा। यही कारण है कि सीमा पार से बार-बार इस काम को रोकने की साजिश रची जा रही है। BSF इसी क्रिमिनल नेक्सस को तोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है और यह बाड़बंदी उसी दिशा में सबसे बड़ा प्रहार है।
तनाव को कम करने के लिए हुई फ्लैग मीटिंग में भारत का नेतृत्व 174वीं बटालियन के कमांडर विनोद कुमार ने किया, जबकि बांग्लादेश की ओर से 51 BGB बटालियन के लेफ्टिनेंट कर्नल नाजियुर रहमान शामिल हुए। बैठक में भारत ने अपना पक्ष स्पष्ट रखा कि सीमा सुरक्षा से जुड़े कार्यों में कोई पीछे नहीं हटेगा। BGB के 150 गज के दावों को कानूनी और तकनीकी रूप से खारिज कर दिया गया। फिलहाल सीमा पर शांति है, लेकिन BSF का अलर्ट लेवल ‘हाई’ पर है।
यह मामला महज खंभे गाड़ने का नहीं, बल्कि भारत की अखंडता और सुदृढ़ कूटनीति का प्रदर्शन है। भारतीय सुरक्षा बल अब किसी भी ‘गीदड़भभकी’ से पीछे नहीं हटने वाले। जिस समझौते का फायदा उठाकर घुसपैठिए सेंधमारी कर रहे थे, BSF का यह एक्शन उसे हमेशा के लिए खत्म करने का ऐलान है। भारतीय जवानों के इरादे अब किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव में डगमगाने वाले नहीं हैं।
तस्करी के इस जाल ने स्थानीय किसानों और नागरिकों का जीवन मुश्किल कर दिया था। रात में होने वाली चोरी और मवेशी तस्करी से तंग आ चुके ग्रामीणों के लिए यह फेंसिंग एक बड़ी राहत है। जब BGB ने 10-20 गज का झूठा नैरेटिव सेट करने की कोशिश की, तो BSF ने ऑन-ग्राउंड तथ्यों के साथ उसका मुंहतोड़ जवाब दिया। बिना किसी दबाव के आंखों में आंखें डालकर काम जारी रखने का संदेश हर भारतीय के लिए गर्व की बात है।
इस घटना ने दुनिया को संदेश दिया है कि भारत अपने सीमावर्ती इंफ्रास्ट्रक्चर पर आक्रामक रूप से काम कर रहा है। जहां पहले काम फाइलों में अटके रहते थे, आज वहां तेजी से निर्माण हो रहा है। 25 किलोमीटर की यह बाड़ लोहे की जाली मात्र नहीं, बल्कि सुरक्षा का अभेद्य कवच है। स्थानीय लोगों का उत्साह यह स्पष्ट करता है कि वे भी जल्द से जल्द इस कार्य को पूरा होते देखना चाहते हैं ताकि वे निर्भय होकर सो सकें।
विधायक दधिराम रॉय का बयान कूटनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने संकेत दिया है कि यदि आवश्यक हुआ, तो भारत अपने पुराने समझौतों पर पुनर्विचार कर सकता है। भारत एक जिम्मेदार पड़ोसी है, लेकिन सुरक्षा सर्वोपरि है। यह फ्लैग मीटिंग केवल एक शुरुआत है; BSF का दृढ़ संकल्प यह सुनिश्चित करेगा कि भारत की सीमाओं पर किसी भी विदेशी ताकत को आंख दिखाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

