होर्मुज संकट: भारत और ओमान की रणनीतिक जुगलबंदी ने बदला वैश्विक नक्शा, अरब सागर में महाशक्तियों का गेम ओवर

पश्चिम एशिया के समुद्री रास्तों में वर्तमान में भारी तनाव व्याप्त है और विश्व की प्रमुख शक्तियां इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे इस कूटनीतिक द्वंद्व ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों पर संकट के बादल पैदा कर दिए हैं। हालांकि, जब दुनिया एक बड़े संकट की ओर बढ़ रही है, तब भारत ने इस परिस्थिति को अपनी रणनीतिक चतुराई से बदल दिया है। भारत ने ओमान के साथ मिलकर एक ऐसी कार्ययोजना तैयार की है, जिसने वाशिंगटन और तेहरान सहित पूरी दुनिया को अचंभित कर दिया है। हिंद महासागर और अरब सागर के इन लहरों पर भारत का ऐसा कूटनीतिक प्रभुत्व पहले कभी नहीं देखा गया।

होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट और खाड़ी देशों की चिंता

इस वैश्विक शक्ति प्रदर्शन के केंद्र में ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Hormuz Strait) है, जो दुनिया के कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकरा मार्ग है। इस मार्ग पर कोई भी बाधा सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाहाकार मचा सकती है। इस बार का संकट केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं है, बल्कि खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के छह देशों—सऊदी अरब, यूएई, ओमान, कतर, कुवैत और बहरीन—के लिए खाद्य सुरक्षा का मुद्दा बन गया है। ये देश आर्थिक रूप से बहुत समृद्ध हैं, लेकिन अपनी जरूरत का लगभग 85% खाद्य सामान आयात करते हैं। इन अरब देशों के लिए भारत हमेशा से सबसे बड़ा संकटमोचक और अन्नदाता रहा है।

होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के कारण जब मालवाहक जहाजों का आवागमन बाधित होने लगा, तब भारत ने ओमान के साथ मिलकर एक वैकल्पिक मार्ग तैयार किया। ओमान ने अपने रणनीतिक सोहार पोर्ट (Sohar Port) के दरवाजे भारत के लिए खोल दिए, जो इस संकट के समय में एक नई जीवनरेखा के रूप में उभरा है।

सोहार बंदरगाह: रणनीतिक समुद्री बाईपास

इसे इस प्रकार समझा जा सकता है कि जब मुख्य मार्ग पर जाम हो, तो एक सुरक्षित बाईपास के जरिए मंजिल तक पहुंचा जाता है। भारत और ओमान ने समंदर में यही रास्ता निकाला है। ओमान का सोहार बंदरगाह होर्मुज स्ट्रेट की भौगोलिक सीमा से बाहर स्थित है, जिसका अर्थ है कि क्षेत्र में सैन्य तनाव होने पर भी इस बंदरगाह पर कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा।

ओमान ने भारत के साथ अपनी गहरी मित्रता को आगे बढ़ाते हुए इस पोर्ट पर कृषि उत्पादों के लिए एक समर्पित टर्मिनल का निर्माण किया है। यह बंदरगाह एक ऐसे रणनीतिक स्थान पर है जहां से दुनिया के प्रमुख बाजारों तक जहाजों का पहुंचना बहुत आसान है। आज सोहार पोर्ट भारत और पूर्वी अफ्रीका सहित खाड़ी देशों के लिए एक बड़ा गेमचेंजर बन गया है। इसके अलावा ओमान का सलालाह बंदरगाह भी पूरी क्षमता से काम कर रहा है, जो भारत से आने वाले खाद्यान्नों को बिना किसी रुकावट के अरब देशों तक पहुंचा रहा है। यह भारत की प्रभावी और शांत कूटनीति का बेहतरीन उदाहरण है।

ईरान का टोल टैक्स और भारत की काउंटर स्ट्रेटेजी

यह मामला केवल व्यापार का नहीं है, बल्कि एक बड़े आर्थिक खतरे से जुड़ा है। ईरान वर्तमान में होर्मुज स्ट्रेट में एक ‘स्थायी टोल सिस्टम’ लागू करने की योजना बना रहा है। ईरान का तर्क है कि इस संकरे समुद्री मार्ग की सुरक्षा और देखरेख का खर्च काफी अधिक है, इसलिए इस मार्ग का उपयोग करने वाले प्रत्येक देश को शुल्क देना चाहिए। चूंकि ईरान का इस मार्ग के उत्तरी हिस्से पर कड़ा नियंत्रण है, इसलिए वह इसे अपनी आय का स्रोत बनाना चाहता है।

ईरान के राजदूतों और संसद ने इस संबंध में स्पष्ट संकेत दिए हैं कि सुरक्षा के नाम पर हर गुजरने वाले जहाज से वसूली की जाएगी। हालांकि अमेरिका इसका विरोध कर रहा है, लेकिन ईरान अपनी नीति पर अडिग नजर आ रहा है।

यदि ईरान यहां टोल लगाता है, तो भारत पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता, क्योंकि गल्फ देशों के साथ भारत का सालाना व्यापार लगभग 178.56 बिलियन डॉलर का है। टोल बढ़ने से जहाजों का भाड़ा और अंततः कच्चे तेल की कीमतें बढ़ जातीं, जिससे भारत में महंगाई बढ़ सकती थी। लेकिन भारत सरकार ने समय रहते ओमान के साथ रणनीतिक गठजोड़ कर ईरान के इस संभावित आर्थिक प्रहार का तोड़ निकाल लिया है।

1 जून का ऐतिहासिक समझौता: भारत का आर्थिक अस्त्र

भारत और ओमान के बीच 1 जून 2026 से एक ऐतिहासिक ‘फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’ (FTA) प्रभावी होने जा रहा है। यह समझौता वैश्विक व्यापार के समीकरणों को पूरी तरह बदल देगा। ओमान ने साल 2006 में अमेरिका के साथ ऐसा समझौता किया था और अब दो दशक बाद वह भारत के साथ इस तरह की साझेदारी कर रहा है।

इस समझौते के तहत भारत से ओमान जाने वाले 99% उत्पादों पर कोई सीमा शुल्क (Custom Duty) नहीं लगेगा। बदले में ओमान के 95% उत्पादों को भी भारत में टैक्स छूट मिलेगी। इस डील से भारत के सर्विस सेक्टर, ज्वेलरी, लेदर, ऑटोमोबाइल और आयुर्वेद उद्योगों को ओमान के रूप में एक विशाल बाजार मिलेगा। ओमान में वर्तमान में लाखों भारतीय कार्यरत हैं और इस समझौते के बाद भारत की स्थिति वहां और अधिक मजबूत होगी।

धरातल पर बढ़ता निवेश और औद्योगिक शक्ति

भारत और ओमान के संबंध केवल रणनीतिक नहीं बल्कि आर्थिक रूप से भी धरातल पर मजबूत हो रहे हैं। हाल ही में हुए समझौतों के तहत ओमान के सोहार में एल्युमिनियम डाउनस्ट्रीम इकोसिस्टम पर काम शुरू किया गया है। ओमान के पास सस्ती ऊर्जा है और भारत के पास उन्नत तकनीक, जो दोनों देशों के लिए फायदे का सौदा है।

भारत की ‘मल्टी बॉन्ड मेटल एलएलसी’ ने ओमान में 4.5 मिलियन डॉलर के निवेश के साथ एक आधुनिक लैमिनेशन प्लांट लगाने का करार किया है। यह इस बात का प्रमाण है कि भारत अब वैश्विक स्तर पर अपनी औद्योगिक शक्ति का विस्तार कर रहा है।

ओमानी सेना को भारतीय विशेषज्ञों की ट्रेनिंग

आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सैन्य मजबूती अनिवार्य है। आज का भारत अपनी सुरक्षा के लिए केवल स्वयं पर निर्भर है। ओमान की धरती पर हाल ही में भारत की मोबाइल ट्रेनिंग टीम (IMTT) ने एक विशेष सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया, जिसका संचालन भारत के ‘इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ’ ने किया।

इस प्रशिक्षण में ओमान की रॉयल आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने हिस्सा लिया। भारतीय जांबाजों ने उन्हें ‘ऑपरेशनल कॉर्डिनेशन’ और ‘जॉइंट लॉजिस्टिक्स’ जैसी रणनीतियां सिखाईं। यह सहयोग वैश्विक शक्तियों को स्पष्ट संदेश है कि भारत और ओमान अपनी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए एक साथ खड़े हैं।

अरब सागर में भारतीय नौसेना का बढ़ता वर्चस्व

भारतीय नौसेना ने अरब सागर और ओमान की खाड़ी में अपनी उपस्थिति इतनी सशक्त कर ली है कि किसी भी विरोधी ताकत के लिए भारतीय हितों को चुनौती देना असंभव हो गया है।

तनाव को देखते हुए भारत ने इस क्षेत्र में अपने गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स और युद्धपोतों की तैनाती बढ़ा दी है। 2019 से चल रहे ‘मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट’ के तहत अब इस पूरे समुद्री क्षेत्र को एक नौसैनिक किले में बदल दिया गया है।

होर्मुज स्ट्रेट के मुहाने पर भारत के ‘ऑपरेशन संकल्प’ के जरिए वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षा प्रदान की जा रही है। भारतीय नौसेना आज पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ की भूमिका निभा रही है। भारत की इस ओजस्वी कूटनीति और सैन्य शक्ति ने यह सिद्ध कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

Share This Article
Leave a Comment