देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार की अलसुबह एक बेहद गोपनीय पुलिस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। जब पूरी दिल्ली गहरी नींद में थी, तब दिल्ली पुलिस ने बिना किसी शोर-शराबे और हंगामे के पिछले 21 दिनों से चल रहे एक हाई-प्रोफाइल अनशन को समाप्त कर दिया। एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक, जो पिछले तीन हफ्तों से अपनी मांगों को लेकर डटे हुए थे, उन्हें पुलिस ने बड़ी ही सूझबूझ से वहां से उठाकर अस्पताल पहुंचाया। यह केवल एक सामान्य पुलिस कार्रवाई नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक गहरी और सटीक रणनीतिक योजना थी जिसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लागू किया गया।
इस पूरे ऑपरेशन की नींव तब पड़ी जब शुक्रवार को केंद्र सरकार ने दिल्ली पुलिस के नेतृत्व में बड़ा बदलाव किया। सतीश गोलचा की जगह आईबी (IB) के अनुभवी अधिकारी और 1994 बैच के आईपीएस अनुराग कुमार को दिल्ली का नया पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया गया। इस अचानक हुए फेरबदल ने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी थी, लेकिन शनिवार की सुबह होते-होते इस बदलाव का उद्देश्य साफ हो गया।
नए कमिश्नर अनुराग कुमार ने पदभार संभालते ही अपनी कार्यशैली का स्पष्ट संकेत दे दिया। उन्होंने साफ कर दिया कि दिल्ली किसी भी प्रकार की अराजकता का केंद्र नहीं बनेगी। कार्यभार संभालते ही उन्होंने नई दिल्ली रेंज के आला अधिकारियों के साथ बैठक की और जंतर-मंतर पर कड़ी नजर रखने का निर्देश दिया। इसके बाद जो हुआ, वह कानून-व्यवस्था बनाए रखने का एक बेहतरीन उदाहरण था।
शनिवार सुबह सादी वर्दी में तैनात जवानों ने बेहद पेशेवर तरीके से पूरे इलाके को कवर किया। पुलिस को जानकारी थी कि कुछ तत्व स्थिति बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं, इसलिए पूरी रणनीति ऐसी बनाई गई कि किसी को प्रतिक्रिया का मौका न मिले। पुलिस ने सोनम वांगचुक को सुरक्षित तरीके से निकाला और मेडिकल चेकअप के लिए अस्पताल भेज दिया। इस पूरी प्रक्रिया में कहीं भी बल प्रयोग की आवश्यकता नहीं पड़ी।
अब इस त्वरित कार्रवाई के पीछे की मुख्य वजहों और क्रोनोलॉजी को समझना जरूरी है।
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। खुफिया इनपुट्स के अनुसार, इस सत्र से पहले दिल्ली में माहौल खराब करने की साजिश रची जा रही थी। वांगचुक के आंदोलन की आड़ में 20 जुलाई को संसद मार्च का एक बड़ा प्लान तैयार किया गया था। नीट परीक्षा विवाद और अन्य राजनीतिक मुद्दों को ढाल बनाकर सड़कों पर अराजकता फैलाने की तैयारी थी। शुरुआत में सरकार इस धरने को लेकर उदार थी, लेकिन स्थितियां धीरे-धीरे बदल रही थीं।
जैसे-जैसे वांगचुक की सेहत खराब होने की खबरें आईं, जंतर-मंतर पर राजनीतिक नेताओं का जमावड़ा बढ़ना शुरू हो गया। विपक्षी दल इसे एक टूलकिट की तरह इस्तेमाल करने लगे थे ताकि मानसून सत्र से पहले सरकार के खिलाफ एक नैरेटिव खड़ा किया जा सके। इसका मुख्य उद्देश्य राजधानी में अस्थिरता पैदा करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को नुकसान पहुंचाना था।
हालांकि, सरकार इन गतिविधियों पर करीब से नजर रख रही थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया कि संसद की गरिमा और सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा। इसीलिए अनुराग कुमार जैसे इंटेलिजेंस के माहिर अफसर को कमान सौंपी गई, जो बिना शोर मचाए सटीक कार्रवाई करने में सक्षम हैं।
इसी बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने भी सरकार को एक कानूनी आधार प्रदान किया। कोर्ट ने वांगचुक की सेहत का ध्यान रखने के कड़े निर्देश दिए थे। जब समझाने के बावजूद अनशन खत्म नहीं हुआ, तो पुलिस ने कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए उन्हें मेडिकल केयर में शिफ्ट करने का फैसला किया।
कार्रवाई के बाद डीसीपी सचिन शर्मा ने स्पष्ट किया कि सोनम वांगचुक को उनकी स्वास्थ्य स्थिति और हाई कोर्ट के आदेशों के सम्मान में अस्पताल ले जाया गया है। इस कार्रवाई से न केवल वांगचुक की सुरक्षा सुनिश्चित हुई, बल्कि विपक्षी एजेंडे और संसद मार्च की योजना को भी विफल कर दिया गया।
यह घटनाक्रम उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो लोकतंत्र की आड़ में व्यवस्था को बंधक बनाना चाहते हैं। यह ‘नया भारत’ है, जहां अपनी बात रखने का संवैधानिक अधिकार सबको है, लेकिन सिस्टम को ठप करने या ब्लैक मेल करने की अनुमति किसी को नहीं है। शांति भंग करने और संसद का घेराव करने जैसी धमकियों पर प्रशासन अब जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहा है।
कमिश्नर अनुराग कुमार की यह पहली बड़ी कार्रवाई दिल्ली पुलिस के नए और सख्त तेवर को दर्शाती है। आईबी बैकग्राउंड के अफसर जब मैदान में उतरते हैं, तो उनका वार जानकारी और सही समय पर आधारित होता है। जंतर-मंतर का यह सफल ऑपरेशन इसी का परिणाम है।
राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए यह साफ कर दिया गया है कि संसद जैसे लोकतंत्र के मंदिर को भीड़तंत्र का शिकार नहीं होने दिया जाएगा। दिल्ली पुलिस ने समय रहते उचित कदम उठाकर एक बड़े संकट को टाल दिया है। फिलहाल वांगचुक डॉक्टरों की निगरानी में हैं और उनकी स्थिति में सुधार हो रहा है।
राजनीति और मुद्दे अपनी जगह हैं, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में कोई समझौता संभव नहीं है। दिल्ली पुलिस की यह कार्रवाई एक चेतावनी है कि राजधानी में अराजकता फैलाने की किसी भी कोशिश का जवाब कानून की भाषा में तुरंत दिया जाएगा। देश की प्रगति को बाधित करने वाली साजिशें अब सफल नहीं होंगी।

